ट्रेन में हुई थी दोस्ती, मुस्लिम दोस्त ने भूखे बौद्ध दोस्त को पहुंचाई मदद

कहते हैं दोस्त वही होता है, जो बुरे वक्त में काम आए। ऐसी ही दोस्ती ट्रेन में सैफुद्दीन और एक बौद्ध भिक्षु के बीच हुई। दोनों ने एक दूसरे को अपना नंबर दिया। हालांकि उनकी फोन पर कभी बात नहीं हुई। कभी-कभी ट्रेन में मुलाकात हो जाती थी, लेकिन बाद में सैफुद्दीन ने ट्रेन का सफर करना बंद कर दिया तो वह भी बंद हो गई। लॉकडाउन में जब बौद्ध भिक्षु को खाने तक की परेशानी हुई तो सैफुद्दीन ने खूब दोस्ती निभाई।
तीन साल पहले सैफुद्दीन सफर के दौरान ट्रेन में बौद्ध भिक्षु लोबसांग रिचेन से मिले। ट्रेन में दोनों की बात हुई और दोनों ने एक-दूसरे को अपना नंबर दिया। दोनों फेसबुक पर दोस्त बने और फिर ट्रेन में यात्रा के दौरान दोनों की अकसर मुलाकात होने लगी। पेशे से व्यवसायी सैफुद्दीन ने कुछ दिनों बाद ट्रेन की यात्रा बंद कर दी। रिचेन भी चार बौद्ध भिक्षुओं के साथ ठाणे के एक मंदिर में आकर रहने लगे और मुंबई (Mumbai) यूनिवर्सिटी के राजनीतिक शास्त्र की पढ़ाई शुरू कर दी। सैफुद्दीन और रिचेन दोनों अपने काम और जीवन में इतना व्यस्त हो गई कि उन्हें एक दूसरे की याद नहीं रही। 


अचानक बौद्ध दोस्त की आई याद 
बौद्ध भिक्षु भिक्षा के रूप में मिलने वाले भोजन पर ही रह रहे थे। भरोसा करते हैं। लॉकडाउन के चलते लोगों ने शांतिदूत बुद्ध विहार मंदिर में आना बंद कर दिया। वहां मौजूद पांच भिक्षुओं के हालात इतने खराब हो गए कि वे भूख मर रहे थे। कुछ दिनों पहले सैफुद्दीन के बेटों ने 500 से अधिक लोगों के खाने की व्यवस्था की तो सैफुद्दीन को रिचेन की याद आई। उन्होंने सोचा कि वह कैसे रह रहे होंगे। उन्होंने बताया, 'मैंने लोबसांग को फोन किया तो उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। मैंने उससे पूछा कि मैं क्या मदद कर सकता हूं? रिचेन ने दाल, चावल और तेल मांगा' 


बाइक से सामान लेकर पहुंचे मंदिर 
सैफुद्दीन ने अपने दोस्त की मदद के लिए बहुत प्रयास किया लेकिन उन्हें परेशानियों को सामना करना पड़ा। रोड ब्लॉक होने के चलते मंदिर तक कोई भी आपूर्ति करने के लिए तैयार नहीं था। अलग-अलग लोगों को मनाने के बाद उनका शब्बीर भगोरा नाम का एक दोस्त राजी हुआ। वह उसके साथ बाइक से मंदिर तक पहुंचे। 


सैफुद्दीन को दिया धन्यवाद 
रिचेन ने बताया कि वह बहुत खुश हैं। सैफुद्दीन ने उन तक लगभग 15 दिन का राशन पहुंचा दिया है। हालांकि वह पास की झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए चिंतित हैं। सैफुद्दीन ने बताया कि वह अब अपने दोस्त की मदद करते रहेंगे। उनका राशन खत्म होने से पहले कोशिश करेंगे कि कुछ और खाने का सामान उन तक पहुंच जाए।